वक़्त की भी क्या ऐयारी है ,
मेरे आज पे कल के तस्सवुर का बोझ भारी है,
तलाशा हर दर्रा ऐ दराज़ में तुझको ,
पर अभी भी तेरे निशानों की खोज जारी है,
यूँ तो फलक से बरसता है, मन्ना हर दिन ,
पर क्या कहूं दोख्तर ऐ बेकरारी से मेरी यारी है,
मेरे आज पे कल के तस्सवुर का बोझ भारी है,
तलाशा हर दर्रा ऐ दराज़ में तुझको ,
पर अभी भी तेरे निशानों की खोज जारी है,
यूँ तो फलक से बरसता है, मन्ना हर दिन ,
पर क्या कहूं दोख्तर ऐ बेकरारी से मेरी यारी है,
No comments:
Post a Comment