हम नयी पीढ़ी के विज्ञानिक एक नया शोध कर रहें है ,
पेन की निब घिसने को किसी दिफ्फेरेंत से टोपिक की खोज कर रहें है
,
बीमारी , बेचारी , या लाचारी
,
मुरझाती जवानी ,छीनता बचपन
,
corruption , comission या competition
,
पर इस्पे अब और क्या लिखेंगे
,
पढने वाले भी हम पर ही हस्सेंगे
,
नहीं
.
हम नयी पीढ़ी के विज्ञानिक एक नया शोध कर
रहें है ,
पेन की निब घिसने को किसी दिफ्फेरेंट से टोपिक
की खोज कर रहें है ,
उमीदों ,उन्मादों या frustation के किस्से ,
मंदिर की घंटी , या मस्जिद के हिस्से ,
अच्छे तो हैं ,
पर इसमें अपनी intellectuality कैसे भागारेंगे ,
साल दर साल जो
किताबें
रटी
हैं ,
उनका
झोल
कैसे
उबालेंगे
नहीं
हम नयी पीढ़ी के विज्ञानिक एक नया शोध कर रहें है ,
पेन की निब घिसने को किसी दिफ्फेरेंट से टोपिक की खोज कर रहें है ,
लालू के आलू की बातें ,
या हाथी पे बैठे नवयुगी राजे महाराजे ,
त्रिशूल
पे
उगे
कमल
की
गाथा
या
,
बिन बुलाये
युवराज
की
माता
,
यार इनमे अब वो बात नहीं है ,
इस बासी कढ़ी में ,
हम जैसे social scientiston के लायक
औकात नहीं है ,
नहीं
हम नयी पीढ़ी के विज्ञानिक एक नया शोध कर
रहें है ,
पेन की निब घिसने को किसी दिफ्फेरेंट से टोपिक की खोज कर रहें है ,
शहर की मेट्रो ,
या तेरे गाँव का रेट्रो ,
भारत का बुढ़ापा या
इंडिया का बचपन
उठती इमारतें या
या गिरते इंसान ,
बुद्ध के आँगन में दौड़ी फेर्रारी ,
या सुखिया की कीचड में फँसी बैलगाड़ी ,
पर क्या इससे कुछ काम बनेगा ,
हमारी लेखनी से क्या ये फर्क मिटेगा ,
छोडो यार थोडा vague, gernalized सा टोपिक है ,
हम specialiston से नहीं नापेगा ,
नहीं
हम नयी पीढ़ी के विज्ञानिक एक नया शोध कर रहें है ,
पेन की निब घिसने को किसी दिफ्फेरेंट से टोपिक की खोज कर रहें है ,
कोला की घुलती चीनी ,या
तेल पर फिस्सली देशों की रणनीति ,
चाचा sam की दादागिरी ,
या नॉर्थ में जन्मी साउथ की आज़ादी के नयी नीति
हुम्म ,ठीक हैं पर इनमे Relevancy का आभाव है ,
क्या इनसे हम पे पड़ता सहीं में कोई प्रभाव है ,
हम तो पंचशील पे चलते हैं ,
थोडा right, थोडा left झांक कर middle पे ही टिकते हैं ,
बिन बात मुद्दों को क्यों उलझाएँ
सही का बेडा हम ही क्यों उठाएं
नहीं
हम नयी पीढ़ी के विज्ञानिक एक नया शोध कर रहें है ,
पेन की निब घिसने को किसी दिफ्फेरेंट से टोपिक की खोज कर रहें है
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