क्या मेरी कविताओं में ,
मेरी भी झलक मिलती है ,
शब्दों के इन गाँव में ,
क्या मेरी भी फसल दिखती है ,
क्या सच्चा हूँ में ,
अपनी बातों में ,
क्या मेरी बातों से ,
सच्चाई की परख मिलती है ,
क्या मेरी कविताओं में ,
मेरी भी झलक मिलती है ,
कुछ छोट्टी ,कुछ बड़ी पंक्तियाँ ,
कुछ सीधे ,कुछ टेड़े तर्क ,
चंद जिंदगी से लिए उधारी किस्से ,
कुछ फालतू तेरी मेरी ,
क्या इन सब के सार में ,
मेरी भी गंध मिलती है ,
क्या मेरी कविताओं में ,
मेरी भी झलक मिलती है ,
आंसू बन बहे नहीं जो ,
शब्द बन अब उतरे हैं ,
क्या इन शब्दों में ,
आंसू की नमी मिलती है ,
बड़े संजोये थे सपने ,हमने
बीच फंसे वो 'हा -ना के भंवर में ,
क्या इन 'हा -ना ' ओ ,
में मेरी व्याकुलता दिखती है ,
क्या मेरी कविताओं में ,
मेरी भी झलक मिलती
मेरी भी झलक मिलती है ,
शब्दों के इन गाँव में ,
क्या मेरी भी फसल दिखती है ,
क्या सच्चा हूँ में ,
अपनी बातों में ,
क्या मेरी बातों से ,
सच्चाई की परख मिलती है ,
क्या मेरी कविताओं में ,
मेरी भी झलक मिलती है ,
कुछ छोट्टी ,कुछ बड़ी पंक्तियाँ ,
कुछ सीधे ,कुछ टेड़े तर्क ,
चंद जिंदगी से लिए उधारी किस्से ,
कुछ फालतू तेरी मेरी ,
क्या इन सब के सार में ,
मेरी भी गंध मिलती है ,
क्या मेरी कविताओं में ,
मेरी भी झलक मिलती है ,
आंसू बन बहे नहीं जो ,
शब्द बन अब उतरे हैं ,
क्या इन शब्दों में ,
आंसू की नमी मिलती है ,
बड़े संजोये थे सपने ,हमने
बीच फंसे वो 'हा -ना के भंवर में ,
क्या इन 'हा -ना ' ओ ,
में मेरी व्याकुलता दिखती है ,
क्या मेरी कविताओं में ,
मेरी भी झलक मिलती
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