मेरे गीत ,ओ मेरे मीत ,
क्या तू भी मुझसे रूठा है ,
आड़ी तिर्चि कीन्ची लकीरों ,
से क्या तेरा दंभ भी टूटा है ,
कह ते हैं वो समय और था ,
क्या ये पल भी कुछ और ही है ,
ऐसे ही कुछ प्रश्नों ने ,
क्या तेरा भी कुछ लूटा है ,
मेरे गीत ,ओ मेरे मीत ,
क्या तू भी मुझसे रूठा है ,
आज हँसे तो ,
हंसी भी क्या है ,
परसों का रोना भी झूठा है ,
मेने खुद से अक्सर ऐसा ही कुछ पुछा है ,
क्या तुने भी खुद को कभी यूँ टटोला है ,
मेरे गीत ,ओ मेरे मीत ,
क्या तू भी मुझसे रूठा है ,
पढ़ा लिखा क्या खाक किया है ,
कुछ नहीं सब बर्बाद किया है
क्या तुझको भी दुनिया ने ,
कभी इस तरह तोला है ,
मेरे गीत ,ओ मेरे मीत ,
क्या तू भी मुझसे रूठा है ,
क्या तू भी मुझसे रूठा है ,
आड़ी तिर्चि कीन्ची लकीरों ,
से क्या तेरा दंभ भी टूटा है ,
कह ते हैं वो समय और था ,
क्या ये पल भी कुछ और ही है ,
ऐसे ही कुछ प्रश्नों ने ,
क्या तेरा भी कुछ लूटा है ,
मेरे गीत ,ओ मेरे मीत ,
क्या तू भी मुझसे रूठा है ,
आज हँसे तो ,
हंसी भी क्या है ,
परसों का रोना भी झूठा है ,
मेने खुद से अक्सर ऐसा ही कुछ पुछा है ,
क्या तुने भी खुद को कभी यूँ टटोला है ,
मेरे गीत ,ओ मेरे मीत ,
क्या तू भी मुझसे रूठा है ,
पढ़ा लिखा क्या खाक किया है ,
कुछ नहीं सब बर्बाद किया है
क्या तुझको भी दुनिया ने ,
कभी इस तरह तोला है ,
मेरे गीत ,ओ मेरे मीत ,
क्या तू भी मुझसे रूठा है ,
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